Khabarilalnews

mp election news 2024 : भारत में ईवीएम हैकिंग का मामला: ‘व्हिसलब्लोअर’ का खुलासा और 53 करोड़ की पेशकश | Election MP news

mp election news 2024 : भारत में ईवीएम हैकिंग का मामला: ‘व्हिसलब्लोअर’ का खुलासा और 53 करोड़ की पेशकश | Election MP news

mp election news 2024 : भारत में ईवीएम हैकिंग का मामला: 'व्हिसलब्लोअर' का खुलासा और 53 करोड़ की पेशकश | Election MP news

खबरीलाल न्यूज डेस्क :  हाल ही में, एक चौंकाने वाला मामला सामने आया जब एक व्हिसलब्लोअर ने आरोप लगाया कि उसने एक सांसद को 53 करोड़ रुपये में ईवीएम हैक करने की पेशकश की थी। इस खबर ने पूरे देश में सनसनी फैला दी, खासकर महाराष्ट्र और अन्य राज्यों में जहाँ चुनावी माहौल पहले से ही गरम है।

क्या है ईवीएम का मामला ?

ईवीएम का पूरा नाम इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन है, जो भारतीय चुनावों में वोटिंग प्रक्रिया को आसान, त्वरित, और पारदर्शी बनाने के लिए इस्तेमाल की जाती है। इस मशीन का उपयोग 2004 से शुरू हुआ और आज भारत में लगभग सभी चुनावों में इसका उपयोग होता है। यह मशीन वोटिंग को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाकर मैनुअल वोटिंग से जुड़ी कमियों को दूर करती है।

घटना का विवरण: इस मामले का खुलासा तब हुआ जब एक ‘व्हिसलब्लोअर’ ने दावा किया कि महाराष्ट्र के एक सांसद को उसने 53 करोड़ रुपये की पेशकश की ताकि वह ईवीएम हैक कर सके और किसी विशेष पार्टी को फायदा दिला सके। इस घटना के बाद कई सवाल उठने लगे कि क्या वाकई ईवीएम को हैक किया जा सकता है? क्या इसके पीछे कोई राजनीतिक पार्टी है जो गुप्त तरीके से चुनावों को प्रभावित करना चाहती है?

53 करोड़ की पेशकश का मतलब: यह राशि बहुत बड़ी है, और यह बताती है कि अगर यह प्रस्ताव सच है, तो चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए बड़े स्तर पर आर्थिक और राजनीतिक दबाव डाला जा सकता है। हालांकि अभी तक यह साबित नहीं हो पाया है कि इस प्रस्ताव को लेकर कोई ठोस सबूत है या नहीं, लेकिन इससे यह सवाल जरूर उठता है कि क्या भारत की चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह से सुरक्षित है?

बीजेपी और कांग्रेस का रुख: इस मामले को लेकर कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही पार्टियां एक-दूसरे पर आरोप लगा रही हैं। बीजेपी का कहना है कि यह उनके खिलाफ एक षड्यंत्र है और विपक्षी पार्टियां चुनावी प्रक्रिया को बदनाम करना चाहती हैं। वहीं कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का मानना है कि चुनाव में बीजेपी का दबदबा बनाये रखने के लिए गुप्त रूप से ऐसे हथकंडों का इस्तेमाल किया जा सकता है। दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच आम जनता के मन में भी संदेह पैदा हो रहा है।

क्या वास्तव में ईवीएम हैक हो सकती है?

ईवीएम को लेकर पहले भी कई बार सवाल उठाए जा चुके हैं कि क्या इन्हें हैक किया जा सकता है। भारतीय चुनाव आयोग के अनुसार, ईवीएम को हैक करना लगभग असंभव है क्योंकि इन मशीनों में इंटरनेट या किसी बाहरी नेटवर्क से संपर्क नहीं होता। इसके अलावा, हर मशीन को अलग-अलग ढंग से कोडिंग और सिक्योरिटी से लैस किया गया होता है। लेकिन, चुनाव आयोग के दावे के बावजूद, विपक्षी दलों और कुछ तकनीकी विशेषज्ञों ने समय-समय पर इन मशीनों पर सवाल उठाए हैं।

इस मामले का वर्तमान प्रभाव: इस घटनाक्रम के बाद से चुनाव आयोग पर दबाव बढ़ गया है। लोगों में यह डर पैदा हो रहा है कि कहीं चुनावों में पारदर्शिता खतरे में न पड़ जाए। चुनाव आयोग ने भी इस घटना की जाँच के आदेश दिए हैं और व्हिसलब्लोअर द्वारा लगाए गए आरोपों की गहनता से जाँच की जा रही है।

राजनीतिक माहौल पर प्रभाव: यह मामला राजनीति में एक नया तूफान लेकर आया है। बीजेपी और कांग्रेस एक-दूसरे पर आरोप लगाकर आम जनता को प्रभावित करने की कोशिश कर रही हैं। मीडिया में भी इस मुद्दे को लेकर जोरदार बहस छिड़ी है, जिससे यह मामला चुनावों में एक अहम मुद्दा बन सकता है।

क्या वास्तव में बीजेपी ईवीएम हैक करवा रही है?

अब तक इस मामले में कोई ठोस सबूत नहीं मिला है जिससे यह साबित हो सके कि बीजेपी या किसी अन्य पार्टी ने ईवीएम हैकिंग का सहारा लिया हो। लेकिन इस मामले से यह जरूर साबित हो रहा है कि किसी भी पार्टी पर भरोसा करना अब आसान नहीं रह गया है। हालाँकि, चुनाव आयोग और न्याय प्रणाली पर भरोसा रखते हुए यह उम्मीद की जा रही है कि चुनाव प्रक्रिया में निष्पक्षता बनी रहेगी।

विपक्षी दलों का आरोप: विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस, ने इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया है। उनका कहना है कि अगर ईवीएम के साथ छेड़छाड़ हो सकती है, तो यह लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी है। वे चाहते हैं कि इस मामले की गहनता से जांच हो और अगर कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

क्या करना चाहिए?

ऐसे मामले में चुनाव आयोग की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। चुनाव आयोग को न केवल इस मामले की जांच करनी चाहिए, बल्कि ईवीएम की सुरक्षा को लेकर आम जनता के बीच विश्वास को बहाल करने के लिए भी कदम उठाने चाहिए। जनता को विश्वास दिलाना आवश्यक है कि उनका वोट सुरक्षित है और कोई भी बाहरी ताकत उनके मताधिकार पर सवाल नहीं खड़ा कर सकती।

निष्कर्ष:

यह मामला भले ही विवादास्पद है, लेकिन इससे यह बात तो सामने आई है कि भारत की चुनावी प्रक्रिया को लेकर लोगों में संदेह पैदा हो सकता है। देश के चुनावों की निष्पक्षता और पारदर्शिता को बनाए रखना चुनाव आयोग की प्राथमिकता होनी चाहिए। इससे पहले भी चुनावी प्रक्रिया को लेकर कई तरह के सवाल उठे हैं, लेकिन इस तरह के विवादित मामलों से आम जनता में चुनाव प्रक्रिया पर से विश्वास हट सकता है। ऐसे में यह आवश्यक है कि चुनाव आयोग इस मामले को जल्द से जल्द सुलझाए और आवश्यक कदम उठाए ताकि इस तरह की घटनाएं भविष्य में ना हो और लोकतंत्र की नींव को मजबूत बनाए रखा जा सके।

Exit mobile version